श्रीकृष्ण सिंह "बिहार केसरी"



डॉ श्रीकृष्ण सिंह एक ऐसे महान क्रांतिकारी जिन्हें लोग आज भी याद करते है,उनका खासियत उनके जीवन कथा पढ़ कर पता चलता है कि आम व्यक्ति कैसे देश के प्रति अपना व्यक्तिगत कर्तव्य  निभाते है! उन्हें बचपन से पढाई करने का बहुत शौक था! डॉ श्रीकृष्ण सिंह देश आजाद होने के बाद बिहार राज्य के प्रथम मुख्यमंत्री बने, उनके लगन और कार्य की एकाग्रता के वजह से उन्हें सम्मानित किया गया और "बिहार केसरी"  नाम ही उनके जीवन का अहम हिस्सा बन गया!बिहार के बदलाव और विकास में उनके  अद्वितीय व अविस्मरणीय योगदान के लिए "बिहार केसरी" को आधुनिक बिहार के निर्माता के रूप में जाना जाता है! श्रीकृष्ण सिंह बचपन से मेहनती थे, वे पुरे स्कूल में होनहार बच्चे कहलाते थे और तभी से वे  इस देश के लिए अपने कर्तव्य निछावर  करने में जिज्ञासु रहे, उनमें क्रांति करने का जज्बा, सच्चाई , और अच्छाई की खोज में कुछ करने का हौसला हमेशा रहता था ! ये देश की जनता, गाँव-गाँव के बच्चे सम्मान देते, उनके प्रति जो श्रद्धा थी और इसी सम्मान, प्यार से लोग उन्हें  "श्री बाबू" कहकर संबोधित करने लगे थे और आज भी इन्हें इन नामों से जाना जाता है! महापुरुषों में से एक इनकी भी ऐसी कुछ झाँकी सुनाती हूँ ! जिन्हें पढ़कर हमे जिंदगी जीने का वास्तविक मतलब समझ आता है, उनकी बीती यादें ताजा करते है!

श्री बाबू की शुरुआती दौर,जहाँ  उन्होंने एक छोटे से गाँव में जीवनयापन किये, वे मुंगेर जिला के रहने वाले थे , जिनका जन्म 21अक्टूबर1887 को उनके ननिहाल खनवां गाँव में हुआ था , छोटे उम्र में ही उनकी माता की मृत्यु किसी बीमारी के वजह से हो गयी, जिस कारण उनका बचपन अच्छा नहीं रहा और बिना माँ के रहना दुखद भी हो गया था, नाजुक से उम्र में माँ के प्यार को खोना और सर से माँ का  हाथ हट जाना ये दर्द कोई कम नहीं कर सकता था ! वो अपने स्कूल की पढाई गाँव से किये और उसके बाद एम. ए कोलकाता के विश्वविधालय से पूरा कर, वहाँ से वकालत की पढाई करने के लिए पटना आये और पटना से  लॉ की डिग्री प्राप्त किये, इसके बाद वापस मुंगेर में रहकर वकालत की प्रैक्टिस करने लगे! डॉक्टर श्री कृष्ण सिंह पढ़ाई के दौरान भारतीय स्वतंत्रता सेनानी और महान क्रांतिकारी श्री अरविंद और लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक से बहुत प्रभावित थे, इस देश के प्रति उनका पूरा योगदान रहा है!



• अब उनके द्वारा किये गए महान कार्य को जानते है, उन्होनें 1950  में बिहार में सबसे पहले जमींदारी प्रथा को खत्म किया और बिहार जमींदारी प्रथा खत्म होने वाला भारत देश का पहला राज्य बन गया और यह डॉक्टर श्रीकृष्ण सिंह के कारण हुआ था। श्री कृष्ण सिंह बिहार राज्य के विकास के लिए बहुत सारे महान कार्य किए हैं उन्होंने अपने महान कार्यों से बिहार का नाम भारत देश में एक विकसित राज्य के रूप में लोगों के सामने प्रदर्शित किए। उनके इतने वर्षों के शासनकाल में बिहार में उद्योग, कृषि, शिक्षा, सिंचाई, स्वास्थ्य, कला व सामाजिक क्षेत्र में की उल्लेखनीय कार्य हुये।

श्रीकृष्ण सिंह की मुलाकात 1916 में पहली बार गांधी जी से हुई और गांधी जी के विचारों से बेहद  प्रभावित भी हुए उनके द्वारा किये गये आंदोलन में श्रीकृष्ण सिंह का काफी सहयोग रहा था! जब फिर से दुबारा गांधी जी से वो मिले तभी से देश को आजाद करने का प्रण ले लिये और 1921 में वकालत करना छोड़ दिये! गांधी जी के असहयोग आंदोलन का एक हिस्सा बन गए और देश के लिए लड़ने को आगे आये , इस आंदोलन के वजह से जेल भी जाना पड़ा! 1927 में कांग्रेस पार्टी के सदस्य बने वह कांग्रेस पार्टी से जुड़ने के बाद बिहार विधान परिषद के सदस्य बनाए गए और 1929 में बिहार प्रदेश कांग्रेस समिति के महासचिव बनाए गए ! और  इसके बाद गांधी जी के साथ सविनय अवज्ञा आंदोलन कर, अंग्रेजों द्वारा नमक कानून को भंग किये!
गांधी जी से प्रेरित होकर बिहार में "बिहार केसरी"  ने मुंगेर से गंगा नदी पार कर लगभग 100 किलोमीटर लंबी कठिन यात्रा अपने सहयोगियों के साथ अंग्रेजों के काले नमक कानून को तोड़ा था। इसी दौरान अंग्रेजों के अत्याचार से उन्हें काफी समस्यायें झेलनी पड़ी और अंग्रेजों के दुष्ट व्यवहार से परेशान थे, और तब अंग्रेजों द्वारा  इनका शरीर भी नमक  के खौलते पानी से जल गया तो भी इनकी दशा बुरी होने के बावजूद वो हार नहीं माने। गढ़़पुरा के इस ऐतिहासिक नमक सत्याग्रह के बाद महात्मा गांधी ने उन्हें बिहार के प्रथम "सत्याग्रही"  का नाम दिये!
गांधी जी के ऐसे कई आंदोलनों में शामिल हुए, 1942 भारत छोड़ो आंदोलन में श्रीकृष्ण सिंह ने महत्वपूर्ण  भूमिका निभाई हैं! इसके वजह से उन्हें कई बार जेल भी जाना पड़ा! इस देश को स्वतंत्र करने में और अंग्रेजों से लड़ने में कई कार्य किये और सफल भी रहे! इसके बाद से ये अपना जीवन सामाजिक कार्यो में देने लगे!

• श्रीकृष्ण सिंह के वजह से बिहार में बदलाव की एक नई लहर चली जिसके कारण सामाजिक और आर्थिक स्तिथि में परिवर्तन हुआ! उन्होंने बिहार राज्य में पहली रिफाइनरी बरौनी ऑयल रिफायनरी का शुरुआत करे ,खाद कारखाना सिंदरी, और बरौनी रसायनिक खाद कारखाना,स्टील प्लांट सैल बोकारो बरौनी डेयरी जैसे कई विकास किये!  डॉ श्रीकृष्ण सिंह ने कृषि के क्षेत्र में भी निर्माण किये, बिहार भागलपुर रांची आदि में एग्रीकल्चर कॉलेजों का स्थापना हुआ! बिहार परियोजनाओं के क्षेत्र में काफी बढ़ोतरी की और बिहार एक विकसित राज्य बना! बिहार केसरी के योगदान इस देश, समाज, कर्म, कर्तव्य के लिए हमेशा एक समान रहा!



• डॉ श्रीकृष्ण सिंह की मृत्यु 31 जनवरी 1961 में हुई था  बिहार6 केसरी बिहार के पहले पूर्व मुख्यमंत्री डॉ श्रीकृष्ण सिंह ने अपने मुख्यमंत्री के शासनकाल में बिहार के लिए महत्वपूर्ण कार्य किये! उनकी द्वारा किये गए कार्य को हम सब सराहना और सम्मानित करते हैं! एक कोशिश के साथ कुछ छंद उनके सम्मान के लिए मैं लिखी हूँ!



जन्में जो सेनानी गाँव की भीड़ में,

स्वप्न बोते जो बचपन की खेल खुद में,

कहाँ मिलते वैसे  क्रांति इस जुग में!

माँ की आँचल की छावँ खोया नाजुक सी उम्र में,
फिर भी धरती माँ के लिए लड़े आख़िरी सांसों में,
कहाँ मिलते वैसे पुत्र इस जुग में!

पढ़ने की ललक रही बचपन से जवानी में,
वकालत छोड़ी तो कुर्बान हुए इस देश में,
कहाँ मिलते वैसे क्रांति इस जुग में,

अंग्रेजों को भगाया जो काटे जीवन जेल में,
फिर भी हारे नहीं लड़े मृत्यु तक इसी देश में,

कहाँ मिलते वैसे महापुरुष इस जुग में!
                                      - अंकिता राज
अपनी लिखावट को यही विराम देती हूँ! शुक्रिया

ANKITA RAJ

BANARAS HINDU UNIVERSITY🎓

Comments

Post a Comment

Popular posts from this blog

बिहार (BIHAR)